Vishal ki short story hindi mein | लघु कहानी हिंदी में, सीधा साधा लड़का

छात्र द्वारा लिखित हिंदी लघु कहानी - इस कहानी का किसी से किसी भी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर कोई सम्बन्ध पाया जाता है- तो वो मात्र एक संयोग होगा और कुछ नहीं। 

चलिए प्रारम्भ करते हैं -

विशाल नाम का लड़का अपने नाम की तरह उसका दिल भी विशाल था। जो एक छोटे से कसबे में रहा करता था। वहीं खेती बाड़ी कर अपना और अपने परिवार का पेट भरा करता था। गांव की खेती से ही उनका गुजर- बसर चला करता था। 

उनके परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था। परिवार वाले चाहते थे उनका बेटा पढ़ लिख ले और वो दुनिया के तौर तरीके सीख लें। इसके लिए वो उसे शहर भेजना चाहते थे और उन्होंने भेजा भी।

असली कहानी अब आरंभ होती है- 

दरसल कुछ हुआ यूं कि विशाल ने शहर में आकर पढाई तो की लेकिन वह बेहक गया था। कुछ ज्यादा गड़बड़ होती उससे पहले वो संभल गया।

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ममता उर्फ़ पैसों की भूखी ने उसे अपने पापा की बीमारी का झांसा देकर के विशाल से पैसे ले लिए। वो वेचारा सीधा साधा गांव वाला उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आ गया।

लेकिन उसे शक हुआ जब उसने दुबारा उससे 10 दिन बाद फिर से पैसे मांगे। इस बार उसने मना कर दिया और कहा आपने पहले भी ले रखे हैं। लड़की ने कहा एक बार में सारे लोटा दूंगी।

वेचारा विशाल उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आकर जो बचे पैसे थे, वो भी उसने उसे दे दिये। और चुपचाप दूसरों की भलाई के लिए खामोश रहा। खुद दुःख में रहा पर कभी किसी से सहायता नहीं मांगी।

एक दिन उसे कही और से पता चला कि- ममता ने जो उससे पैसे लिए थे, वो उसने अपने पापा के ईलाज के लिए नहीं। बल्कि अपनी बहन की सादी में डिज़ाईनर सूट खरीदने के लिए माँगा था। जो काफी महंगा होता है।

ये सब जान लेने के बाद भी विशाल ने अपने विशाल हृदय का परिचय दिया और ममता को कुछ भी नहीं कहा। अपनी पढाई कर अपने घर यानि कि अपने गांव लोट आया।

सभी घर वाले फुले नहीं समां रहे थे। सबने खूब लाड प्यार किया और विशाल सब भूल कर फिर से अपने गांव वाली भूमिका में आ गया। 

अब वो पहले से ज्यादा मेहनत करने लगा था। क्योंकि उसे पता है, मेहनत ही सफलता की कुंजी है। उसने खूब परिश्रम किया। लेकिन वो पैसों वाली बात भुला नहीं पा रहा था।

वो कहावत है ना - उस ऊपर वाले के यहाँ देर है पर अंधेर नहीं। उसने अपना चक्र चलाया और विशाल, विशाल माकन वाला बन बैठा। ममता उर्फ़ लालची आज भी वहीं है जहाँ वो कल थी। इसीलिए कभी किसी को बेवकूफ बना कर या चालाकी से धन नहीं कमाना चाहिए। 

उददेश्य/निष्कर्ष - 

आप अपने तरफ से कभी किसी का बुरा मत करो। वो ऊपर वाला जरुर आपका साथ देगा। बस उसपे विश्वाश रखो और सत् कर्म करते रहो।

धन्यवाद ! 

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3 Comments

Jai Hind said…
Ye kon hai Sir!
Ankit to nahi.😊
Pappi said…
क्या है बकवास सी कहानी.... चिर्कंडे....����
Hindi Best BloG said…
@Jai Hind ask to VIIC HR